बांझपन के लिए- अकेली महिलाओं को दोषी नहीं ठहराया जा सकता

भारत के पुरुष प्रधान समाज में गर्भाधान, गर्भावस्था और प्रसव जैसे मुद्दे सदियों से महिलाओं के साथ जुड़े रहे हैं। ज्यादातर पुरुष शादी के बाद अपना परिवार शुरू करना चाहते हैं। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि बहुत कम पुरुष है जो प्रजनन स्वास्थ्य और प्रजनन संबंधी मुद्दों के बारे में पूरी तरह से जानते हैं। जब एक महिला गर्भवती नहीं होती है, तो पुरुष की शारीरिक कमियों पर किसी का ध्यान नहीं जाता है।

बांझपन की समस्या को, अक्सर महिलाओं की समस्या के रूप में देखा जाता है। भारतीय समाज में पुरुष बांझपन की जांच करवाने में थोड़ा झिझकते हैं। कई मामलों में, जाँच-पड़ताल करने के बाद मन चाहे परिणाम न आने पर खुद को हीन समझने लगते है और चुप्पी साध लेते हैं। बांझपन के कारण साधी

हुई चुप्पी, पुरुषों में प्रजनन समस्याओं के सम्बन्ध में कई सारी अज्ञानता और गलतफहमीयों को पैदा कर  है।

यदि कोई दंपत्ति गर्भ धारण करने में असमर्थ है, तो यह संतानहीनता पुरुषों और महिलाओं के हार्मोनल विकारों के कारण हो सकती है। पर अधिकांश मामलों में महिलाओं को दोषी माना जाता है। केवल महिला के अंडों की गुणवत्ता का कम होना ही बांझपन का कारण नहीं है बल्कि यह पुरुष प्रजनन क्षमता का भी कारण हो सकता है। गर्भाधान और बांझपन के लिए पुरुष और महिला दोनों समान जिम्मेदारी निभाते हैं।

वर्तमान समय की बात करें तो, लगभग 56% दंपति की संतानहीनता का कारण पुरुष बांझपन है। सामान्य तौर पर, 40 प्रतिशत से अधिक पुरुषों में कहीं न कहीं बांझपन की समस्या होती है। ऐसी स्थिति में, जब दंपति को

गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है, तो पुरुषों और महिलाओं दोनों की जांच की जानी चाहिए।

यदि कोई दंपति लंबे समय से माता-पिता बनाने की कोशिश कर रहा है और अभी तक संतान सुख से वंचित है, तो संबंधित दंपति को बिना किसी देरी के चिकित्सीय अर्थात डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। पुरुषों में बांझपन तेजी से बढ़ रहा है

आधुनिक समय में पुरुषों में बांझपन भी तेजी से बढ़ रहा है। तनाव, नशा, प्रदूषण और खराब जीवनशैली ने पुरुषों में बांझपन की समस्या को पैदा किया है। पुरुष बांझपन कई बीमारियों अन्य को दावत देता है जैसे कि हृदय से संबंधित रोग। इसे पुरुषों का पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है।

पुरुष बांझपन का अर्थ नपुंसकता नहीं है

आज के समय में भी बहुत से लोग बांझपन और नपुंसकता के बीच के अंतर को नहीं जानते हैं और पुरुषों
के बांझपन की समस्या को नपुंसकता के रूप में देखते है। नपुंसकता, जिसे मेडिकल टर्म में इरेक्टाइल डिसफंक्शन या स्तंभन दोष के रूप में जाना जाता है। पुरुष बांझपन शारीरिक कमी को इंगित करता है। इसका नपुंसकता से कोई लेना-देना नहीं है।

पुरुष बांझपन को दूर करने के उपाय

आधुनिक विज्ञान ने बहुत तरक्की की है। पुरुष बांझपन की समस्या से लड़ने के लिए कई तकनीकों और उपचारों का विकास किया है।

भारत के पुरुष प्रधान समाज में गर्भाधान, गर्भावस्था और प्रसव जैसे मुद्दे सदियों से महिलाओं के साथ जुड़े रहे हैं। ज्यादातर पुरुष शादी के बाद अपना परिवार शुरू करना चाहते हैं। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि बहुत कम पुरुष है जो प्रजनन स्वास्थ्य और प्रजनन संबंधी मुद्दों के बारे में पूरी तरह से जानते हैं। जब एक महिला गर्भवती नहीं होती है, तो पुरुष की शारीरिक कमियों पर किसी का ध्यान नहीं जाता है।

बांझपन की समस्या को, अक्सर महिलाओं की समस्या के रूप में देखा जाता है। भारतीय समाज में पुरुष बांझपन की जांच करवाने में थोड़ा झिझकते हैं। कई मामलों में, जाँच-पड़ताल करने के बाद मन चाहे परिणाम न आने पर खुद को हीन समझने लगते है और चुप्पी साध लेते हैं। बांझपन के कारण साधी

हुई चुप्पी, पुरुषों में प्रजनन समस्याओं के सम्बन्ध में कई सारी अज्ञानता और गलतफहमीयों को पैदा कर  है।

यदि कोई दंपत्ति गर्भ धारण करने में असमर्थ है, तो यह संतानहीनता पुरुषों और महिलाओं के हार्मोनल विकारों के कारण हो सकती है। पर अधिकांश मामलों में महिलाओं को दोषी माना जाता है। केवल महिला के अंडों की गुणवत्ता का कम होना ही बांझपन का कारण नहीं है बल्कि यह पुरुष प्रजनन क्षमता का भी कारण हो सकता है। गर्भाधान और बांझपन के लिए पुरुष और महिला दोनों समान जिम्मेदारी निभाते हैं।

वर्तमान समय की बात करें तो, लगभग 56% दंपति की संतानहीनता का कारण पुरुष बांझपन है। सामान्य तौर पर, 40 प्रतिशत से अधिक पुरुषों में कहीं न कहीं बांझपन की समस्या होती है। ऐसी स्थिति में, जब दंपति को

गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है, तो पुरुषों और महिलाओं दोनों की जांच की जानी चाहिए।

यदि कोई दंपति लंबे समय से माता-पिता बनाने की कोशिश कर रहा है और अभी तक संतान सुख से वंचित है, तो संबंधित दंपति को बिना किसी देरी के चिकित्सीय अर्थात डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। पुरुषों में बांझपन तेजी से बढ़ रहा है

आधुनिक समय में पुरुषों में बांझपन भी तेजी से बढ़ रहा है। तनाव, नशा, प्रदूषण और खराब जीवनशैली ने पुरुषों में बांझपन की समस्या को पैदा किया है। पुरुष बांझपन कई बीमारियों अन्य को दावत देता है जैसे कि हृदय से संबंधित रोग। इसे पुरुषों का पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है।

पुरुष बांझपन का अर्थ नपुंसकता नहीं है

आज के समय में भी बहुत से लोग बांझपन और नपुंसकता के बीच के अंतर को नहीं जानते हैं और पुरुषों
के बांझपन की समस्या को नपुंसकता के रूप में देखते है। नपुंसकता, जिसे मेडिकल टर्म में इरेक्टाइल डिसफंक्शन या स्तंभन दोष के रूप में जाना जाता है। पुरुष बांझपन शारीरिक कमी को इंगित करता है। इसका नपुंसकता से कोई लेना-देना नहीं है।

पुरुष बांझपन को दूर करने के उपाय

आधुनिक विज्ञान ने बहुत तरक्की की है। पुरुष बांझपन की समस्या से लड़ने के लिए कई तकनीकों और उपचारों का विकास किया है।


Warning: Use of undefined constant php - assumed 'php' (this will throw an Error in a future version of PHP) in /home/customer/www/morpheusivf.com/public_html/blog/wp-content/themes/morpheus/single.php on line 67